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Why did the mathematician Ramanujan not have any close friends/ आख़िर क्यों महान गणितज्ञ रमानुजम् के कोई करीबी दोस्त नहीं था।

वैसे तो महान गणितज्ञ रमानुजम् को कौन नहीं जनता जिन्हिने infinite ∞ यानी अनंत की खोज किये था, आज भी गणितज्ञ उनके लिखे सूत्रों पर खोज कर रहे हैं, हम आज उन्ही का एक किस्सा इस लेख द्वारा प्रस्तुत कर रहे हैं। 



आख़िर क्यों महान गणितज्ञ रमानुजम् के कोई करीबी दोस्त नहीं था। 

गणितज्ञ रामानुजम का कोई करीबी दोस्त नहीं था और किसी ने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि वे वह करीबी दोस्त बनाना चाहता थे, लेकिन कोई भी उसकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।

और जब उनसे पूछा गया कि वह अपने दोस्त से कैसा होने की उम्मीद करते है, तो उन्होंने जवाब दिया की, "जैसे संख्या 220 और 284!"

वह व्यक्ति भ्रमित हो गया और पूछा कि दोस्ती और इन नंबरों के बीच क्या संबंध है!

रामानुजम ने उसे प्रत्येक संख्या के भाजक खोजने के लिए कहा!

बड़ी कठिनाई के साथ, उस व्यक्ति ने उन्हें निकाला और सूचीबद्ध किया,

 220 → 1,2,4,5,10,11,20,22,44,55,110,220

 284 →1,2,4,71,142,28

रामानुजम ने फिर उस व्यक्ति से 220 और 284 की संख्या को बाहर करने के लिए कहा और शेष भाजक का योग पूछा।

 वो शख्स देखकर हैरान रह गया, ये सख्या के भाजक का योग एक दूसरे के बराबर आ रहे थे। 

 220 → 1+2+4+5+10+11+20+22+44+55+110=284

 284 →1+2+4+71+142=220

 रामानुजम ने समझाया कि एक आदर्श मित्रता एक दूसरे के पूरक के लिए इन नंबरों की तरह होनी चाहिए।  एक के न होने पर भी दूसरे को मित्र का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। 



Mathematician Ramanujam didn’t have any close friends and someone asked him the reason. He replied that although he wanted to have close friends but nobody was up to his expectations.

When pressed how he expected his friend to be,  he replied,  "like numbers 220 and 284!"

The person got confused and asked what is the connection between friendship and these numbers!

Ramanujam asked him to find the divisors of each number! 

With much difficulty, the person derived and listed them as, 

220 → 1,2,4,5,10,11,20,22,44,55,110,220

284 →1,2,4,71,142,284

Ramanujam then asked the person to exclude the numbers 220 and 284 and asked the sum of the remaining divisors.

The person was astonished to find,

220 → 1+2+4+5+10+11+20+22+44+55+110=284

284 →1+2+4+71+142=220

Ramanujam explained that an ideal friendship should be like these numbers, to complement each other. Even when one is absent, the other should represent the friend!

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