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Takala pahad टकला पहाड़

 टकला पहाड़ (Short story)


राजपुर में राजा हनुमंत राय का राज्य था , राज्य का  दायरा काफी बड़ा और मनमोहक था , दूर दूर तक फैली पाडिया उसके राज्य की सुंदरता पर चार चंद लगा देती थी , दूर दूर से लोग उनके राज्य में भ्रमण करने आते थे और प्राकृतिक   सुंदरता देखकर दांग रह जाते थे , उसी राज्य में एक बंजर पहाड़ था जिसपे कुछ  भी  नहीं  था , न पेड़ न जानवर बस पहाड़ के बीच में एक छोटा सा टीला था , वहीएक एकलौता बंजर पहाड़ था जो राज्य की सुंदरता को  ख़राब कर रहा था , सब उस पहाड़ को  टकला पहाड़ कहते थे , उस पहाड़ की एक खासियत थी की उस पर पत्थर फेकने पर उससे झन्न झन्न की आवाज़ आती थी। 



एक दिन एक अँगरेज़ उनके राज्य में घूमने आया तो वहां की सुंदरता देखकर दंग रह गया , फिर उसने  टकला  पहाड़ को देखा तो उसे अजीब लगा उसने उसपर  चढ़कर  उसका मुआइना किया तो उसे पता चला ये पहाड़ तो और पहाड़ियों से अलग है इसकी बनवाट  भी कुछ अजीब सा है  फिर उसने उस पहाड़ी की जानकारी लोगो द्वारा ली तो उसे पता चला की पहाड़ पर पत्थर फेंकने पर झन्न झन्न की आवाज़ की आवाज आती है उसने इस पहाड़ी की  जाँच सुरु की और जाँच के बाद राजा साहेब के पास गया और उस बंजर पहाड़ी को खरीदने की गुहार लगाई और इसकी कींमत भी अच्छी दी तो राजा ने कहा ये हमारे राज्य पर एक धब्बा है मैं आपको ये पहाड़ी बेच देता हु, परन्तु हनुमंत राय के  पिता पहाड़ी बेचने से मना  किया और बोले ये हमारे पुरखो का है इसे क्यों बेच रहे हो यहाँ बच्चे खेलते है , इसकी कीमत पैसो में मत तौलौ मेरे दादा जी इस पहाड़ी की जिम्मेदारी मुझे दी थी फिर राजा हनुमंत राय ने एक न सुनी और उस अंग्रेज को टकला पहाड़ बेच दिया  । 



अँगरेज़ ख़ुशी ख़ुशी वहां  से  चला गया और फिर दूसरे दिन कुछ मजदूर और मशीन लेकर टकला पहाड़ की ओर चल दिया और उसे तोड़ने के लिए आदेश दे दिया, जब उस पहाड़ को तोडा जा रहा था तो पुरे राज्य के लोग वहा  पहुंच गए , राजा भी वह उस कार्क्रम को देखने पहुंचे हुए थे ।

दो दिन लग गए परन्तु  पहाड़ अब भी नहीं टुटा था , लगातार चार दिन तक पहाड़ को तोडा गया , तब एक दिन अचानक से  पहाड़ तोड़ते तोड़ते दो मजदुर अंदर गिर गए, तब पता चला पहाड़ तो अंदर से खोखला था , रस्सी द्वारा अंग्रेज उस पहाड़ के अंदर गया तो हैरान रह  गया , उसमे  तो खजान भरा  पड़ा था सोने चांदी के बर्तन सिक्के हिरे मोती इत्यादि ये खजान तो राजा के खजाने से कही ज्यादे था। 

राजा ने जब देखा तो उनकी आंखे खुली की खुली रह गई ,तब उसके पिता ने उसे बताया की इस पहाड़ की रखवाली के लिए मेरे दादा जी ने कहा था परन्तु तुमने इसे बेच दिया।  अब पछताते रहो। 






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