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अक्तूबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैंसभी दिखाएं
ईशकबाज़ी की लत ।
आख़िर क्यों ।
हम भारत को आज़ाद कहकर रोतें है!
एक फ़कीर रख ।
ग़ुरूर होना चाहिये ।
रोक सके तो रोक ले मुझको !
कोई तुम्हारा नहीं होता ।
न जाने कितनी  यादें ।
मैं अचंभित हूँ ।
तेरी चाहत ।
आवारगी !!
आदत सी है मुश्कुराने की